
यह जो तस्वीर ऊपर लगी है यह वास्तु का अदभुत नमूना है।
कुछ समय पहले मेरा दुबई जाना हुआ । दुबई फ्रेम के बारे में तो सुना ही था — सुनहरा, भव्य और आधुनिक।
मैं भी सोच रही थी कि चलो एक बढ़िया फोटो खींच लेते हैं।
लेकिन जैसे ही मैं उसके पास पहुँची, एक लाइन ने मेरे कदम रोक दिए।
🌀 “This frame is designed using the Golden Ratio.”
मैं कुछ पल वहीं खड़ी रह गई… मन में सवाल उठने लगे — क्या दुबई जैसे इस्लामिक देश में भी वास्तु के सिद्धांत माने जाते हैं?
फिर मुझे याद आया — यही तो वो अनुपात है जिसे हमारे वास्तु शास्त्र में “सर्वतोभद्र निर्माण” कहा गया है।
📐 यानी एक ऐसा अनुपात — 1:1.618 — जो किसी भी स्थान में ऊर्जा का संतुलन बनाए रखता है।
और यही बात हम महावैदिक वास्तु में भी तो करते हैं!
जब हम किसी घर, ऑफिस या प्रोजेक्ट को डिज़ाइन करते हैं, तो सिर्फ दिशा ही नहीं, हम इस गोल्डन रेशियो यानी सर्वतोभद्र अनुपात का भी विशेष ध्यान रखते हैं — ताकि वहाँ रहने वालों को केवल सुंदरता ही नहीं, ऊर्जा, स्थिरता और समृद्धि भी मिले।
दुबई फ्रेम को देखकर एक बात मन में गहराई से उतर गई — हमारा प्राचीन ज्ञान आज विश्वभर में आदर्श बन रहा है।
अब ज़रूरत है कि हम भी उस ज्ञान को सिर्फ किताबों में नहीं, अपने जीवन की नींव में उतारें।
आचार्या दीपिका जैन
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